Prabhat Books
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संपादकीय

राजनीति के रंग, न्यायपालिका और कॉलेजियम तथा कुछ अन्य समस्याएँ
हमारे लोकतंत्र के तीन मुख्य स्तंभ हैं-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। ...और आगे

प्रतिस्मृति

यादों के घेरे यादों के घेरे
रात भर उसे नींद नहीं आई है। डनलप का गद्दा क्योंकर इन तख्तियों पर रख दिया जाता है, ...और आगे

लघुकथा

पापी पेट
छोटा सा डॉक्टर, बड़ा पेट, बड़ा बँगला, सिकुड़ा हुआ अंडर ग्राउंड क्लीनिक, तगड़ी फीस, इस पर मरीजों की भीड़। ...और आगे

आलेख

औपनिवेशिक मानसिकता का साहित्य पर प्रभाव औपनिवेशिक मानसिकता का साहित्य पर प्रभाव
स्वतंत्र भारत में भोपाल में पहला लोकमंथन हुआ है। ...और आगे

कहानी

ठीकरे का मोल ठीकरे का मोल
आज सुबह से ही घर में गहमा-गहमी है। मणिका को देखने के लिए कुछ लोग आ रहे हैं। ...और आगे

कविता

हम पुरइन के पात हो गए हम पुरइन के पात हो गए
हंसा सुनो! साँझ घिर आई, हंसा सुनो! साँझ घिर आई ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

बडे़ साहित्यकार का संकट बडे़ साहित्यकार का संकट
इससे कौन इनकार कर सकता है कि वह साहित्य का बड़ा और ऊँचा झाड़ है? ...और आगे

ललित निबंध

लोकोत्तर या लोकायित काव्य
अरुणोदय होते ही अवसन्न विश्वमन के विजडि़त द्वार, बंद घरों, हवेलियों के लौह कपाट, अंधगुहा मार्ग एवं चिंतन के शतसहस्रार देखते-ही-देखते खुलने-खिलने लग जाते हैं। ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

जो है अभी भी युवा
मैं जाना चाहता हूँ उसके साथ...मैं जाना चाहता हूँ उसके साथ, जिसे मैं प्रेम करता हूँ ...और आगे

व्यंग्य

फाइल मिल गई फाइल मिल गई
यमराज का विशाल न्यायालय आत्माओं से खचाखच भरा हुआ था। ...और आगे

लोक-साहित्य

मेरे गाँव की अद्भुत परंपरा - रासोत्सव
महाराष्ट्र राज्य के नाशिक जिले में बागलान तहसील में मुल्हेर नाम का छोटा सा ग्राम है। ...और आगे

बाल-संसार

धरती के सितारे, अंतरिक्ष में उतारे
आज बेटी अमला की १५वीं सालगिरह थी। अतिथियों से हॉल खचाखच भरा था। ...और आगे

निबंध

सूरा सो पहचानिए सूरा सो पहचानिए
पर्वत से अनेक छोटे-बड़े जलस्रोत निकलते हैं। पर्वत प्रत्येक को एक संदेश देते हुए कहता है। ...और आगे

यात्रा-संस्मरण

रे ना मानेगो! तो जै ले राधाजी की गुलेल! रे ना मानेगो! तो जै ले राधाजी की गुलेल!
आज का दिन भी दौड़ा-दौड़ा, भागा-भागा सा है। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

जी गांधी
अरुण गांधी कंधे से लैपटॉप का बैग उतारकर जब व्हील चेयर पर बैठ गया तो एक नौकर आया, जिसने सफेद वरदी पहन रखी थी। ...और आगे